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भारत - चीन विवाद (भाग-2)

पैंगोंग झील संघर्ष

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हम सबसे पहले समाचार पत्रों में प्रकाशित एक समाचार को देखते हैं जिसमें एक "चित्र 1" के माध्यम से "पैंगोंग झील" के उत्तरी किनारे पर "फिंगर 4" से लेकर "फिंगर 8" के बीच की स्थिति को समझने का प्रयास किया है। 

चित्र 1

इस "चित्र 1" में हरि रेखा के जरिए, नियंत्रण रेखा (LAC) को दिखाने का प्रयास किया गया है, तथा झील के पास यह रेखा "फिंगर 8" से पास करती है और यहां तक भारतीय क्षेत्र के होने की बात कहीं है, तथा यह समझाने का प्रयास किया गया है की चीनी सेना "फिंगर 8" से घुसकर भारत की सीमा में "फिंगर 4" तक पहुंच गई है तथा "फिंगर 8" से "फिंगर 4" के बीच के "भारतीय हिस्से" पर कब्जा करके बैठी है।

सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारियों के आधार पर हम यह समझने का प्रयास करेंगे, कि क्या  लेख में जो बताया गया हैं वही पूरी तरह से ठीक है? और क्या वाकई में चीन की सेना "भारतीय क्षेत्र" में घुसी हुई है? अथवा इस तरह की खबरें मात्र कोरी कल्पनाएं ही है।

तथ्यों को ठीक से समझने के लिए लेख में दिए गए कुछ शब्दों को ठीक से समझना आवश्यक है यहां पर यह जान लेना जरूरी है की "फिंगर्स" क्या दिखा रहे हैं यह जान लेना जरूरी है की पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे पर पहाड़ियां हाथ की उंगलियों की तरह मौजूद है अत्यंत दुर्गम क्षेत्र होने की वजह से और सीमाओं के निर्धारण में स्पष्टता को बरतने के लिए झील के किनारों पर मौजूद सभी पहाड़ियों को फिंगर का नाम दिया गया है, जैसे कि फिंगर 3 मतलब 3  नंबर की पहाड़ी फिंगर 7 मतलब 7 नंबर की पहाड़ी और इसी तरह से...

इसको समझने के लिए सबसे पहले हम पैंगोंग झील की भौगोलिक स्थिति और उसके ऊपर भारतीय और चीनी दावों की जानकारी प्राप्त करते हैं, जैसा की "चित्र 2" में यह दिखाया गया है:
                               
चित्र 2

पैंगोंग लेक जिसकी कुल लंबाई लगभग 135 किलोमीटर है, तथा इसकी अधिकतम चौड़ाई लगभग 5 किलोमीटर है इस झील का एक तिहाई हिस्सा भारत द्वारा 1947 से भी पहले से नियंत्रित किया जाता रहा है, तथा दो तिहाई हिस्सा चीन के क्षेत्र में पड़ता है, चीनी क्षेत्र के हिस्से में यह झील नेशनल हाईवे "G219" (चित्र 2 में पीली रेखा) को स्पर्श करती है। यह स्थिति प्राकृतिक रूप से एवं भारत की आजादी से पहले से रही है। कृपया "चित्र 2" देखें।

जैसा कि "चित्र 3" में दिखाया जा रहा है कि, एक "गुलाबी" रेखा "पैंगोंग झील" से गुजर रही है, और यह रेखा भारत के "काराकोरम पास" तक जाती है। यह वही रेखा है जहां तक 1962 के युद्ध के दौरान चीनी सेनाओं ने अतिक्रमण किया था। पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे पर चीनी सेना आज भी इसी रेखा को LAC मानती है और यह रेखा लगभग "फिंगर 4" से गुजरती है।               
              
चित्र 3

इसी "चित्र 3", में एक नीली रेखा भी दिखाई देती है जो की चीनी सेना द्वारा युद्ध विराम किए जाने के बाद, तथा स्वेच्छा से, भारतीय सीमा में ही थोड़ा पीछे हटने की वजह से बनी। 1962 से 2020 तक यही रेखा "नियंत्रण रेखा" बनी हुई है। 

यही नीली रेखा भारत की वर्तमान "नियंत्रण रेखा" (LAC) भी है, तथा यह रेखा पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे पर "फिंगर 8" के पास से गुजरती है।

यही नीली नियंत्रण रेखा "पैंगोंग झील" के पास भी (चित्र 4 देखें) दिख रही है। और यह रेखा "फिंगर 8" के नजदीक से गुजरती  है, साथ ही झील से "गुलाबी" रेखा "फिंगर 4" से गुजरती  
       
चित्र 4

पंगोंग झील के उत्तरी किनारे पर भारतीय पक्ष, "फिंगर 8" से गुजरने वाली रेखा को नियंत्रण रेखा (LAC) मानता है, वही चीनी पक्ष "फिंगर 4" से गुजरने वाली रेखा को नियंत्रण रेखा (LAC) मानता है। जैसा की "चित्र 4" में दिख रहा है, अतः यहां मत भिन्नता है, और यह एक "घोषित विवादास्पद" क्षेत्र है। भारत अपना दावा "फिंगर 8" तक करता है, तथा चीन अपना दावा "फिंगर 4" तक के क्षेत्र पर करता है। अतः "फिंगर 4" से "फिंगर 8" के क्षेत्र को दोनों पक्षों की आपसी सहमति से "नो मैंस लैंड" घोषित कर दिया गया है। 

चीनी सेना की स्थाई मौजूदगी "फिंगर 8" पर है, और भारतीय सेना की तैनाती "फिंगर 4" तक है। "फिंगर 4" से लेकर "फिंगर 8" तक का क्षेत्र "no man's land" है। तथा दोनों ही पक्षों की पेट्रोलिंग के लिए ही उपलब्ध रहता है।और इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का स्थाई अथवा अस्थाई निर्माण प्रतिबंधित है।

अपनी कुटिलताओं का परिचय देते हुए 1999 में जब भारत कारगिल मैं युद्ध लड़ रहा था, उसी दौरान चीन ने "फिंगर 8" से लेकर "फिंगर 4" तक पक्की सड़क का निर्माण कर लिया, लेकिन भारत की 1999 से अभी तक की सभी सरकारों द्वारा, इस पर किसी प्रकार की कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं की गई, हालांकि भारतीय सेना की पेट्रोलिंग पूर्ववत जारी रही।

यह वही स्थान है जहां पर 5 मई 2020 को भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच में झड़प हुई और तभी से यहां पर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, तथा यही वह स्थान है जहां चीन ने इस "नो मैंस लैंड" मैं घुसकर "फिंगर 4" के आसपास अपनी संख्या बढ़ाई है और कुछ अस्थाई तथा आंशिक रूप से स्थाई निर्माण किया है। नीचे "चित्र 5" में देखें।
                           
                
चित्र 5

एक ध्यान देने वाली बात है की, यह एक "घोषित विवादित"  तथा "नो मैंस लैंड" क्षेत्र है, भारत द्वारा नियंत्रित क्षेत्र "फिंगर 4" तक होता है।

यहां पर यह भी ध्यान देने योग्य है, कि भारतीय सेना का पोस्ट "फिंगर 4" पर 1962 से है। और इसके थोड़ा सा ही पीछे ("फिंगर 3" और "फिंगर 4" के बीच) आइटीबीपी का पोस्ट भी है। जिसके जरिए भारतीय सेना और आईटीबीपी इस क्षेत्र की निगरानी करते हैं। साथ में "फिंगर 8" पर चाइनीस सेना का पोस्ट 1962 से है, जहां से वह निगरानी करते हैं "फिंगर 4" से "फिंगर 8" के बीच जो भी क्षेत्र है इस क्षेत्र में दोनों ही सेनाएं पेट्रोलिंग करती हैं तथा  इसे एक विवादित क्षेत्र मानती है।

यहां यह भी ध्यान देने वाली बात है की चीनी सेना ने अभी तक भारत के द्वारा नियंत्रित "फिंगर 4" अथवा उस पर स्थित भारतीय सेना के "पोस्ट" को पार नहीं किया है, चीनी सैनिक "नो मैंस लैंड" में, भारतीय पोस्ट के बहुत नजदीक मौजूद हैं, लेकिन भारत द्वारा नियंत्रित क्षेत्र में नहीं।

ऐसा उपरोक्त लेख से भी यही स्पष्ट होता है।

अतः यह विचारणीय हो जाता है कि:

क्या, भारतीय सेना की अंतिम पोस्ट, पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे पर, 1962 के युद्ध के बाद किसी भी वक्त "फिंगर 4" से आगे "फिंगर 8" तक के क्षेत्र में कहीं भी और कभी भी रही है?

तथ्य

नहीं, भारतीय सेना की अंतिम पोस्ट, 1962 की लड़ाई के बाद से ही "फिंगर 4" पर है।

निष्कर्ष

यह तो स्पष्ट है कि चीनी सेना "फिंगर 4" और "फिंगर 8" के बीच "नो मैंस लैंड" पर मौजूद है, लेकिन यह विचारणीय है कि यदि हम आपसी सहमति से घोषित "no man's land" तथा विवादित क्षेत्र में घुसपैठ को भी अपनी सीमाओं में हुई घुसपैठ मानते हैं, तो हमें निष्पक्ष होकर और  न्याय पूर्ण तरीके से 1962 में बदली गई नियंत्रण रेखा और घुसपैठ के बारे में भी बात करनी चाहिए, जोकि "फिंगर 8" से और आगे तक भारतीय क्षेत्र को दर्शाती है।

आप स्वयं ही इस पर विचार करें।

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