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भारत - चीन विवाद (भाग-2)

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पैंगोंग झील संघर्ष English हम सबसे पहले समाचार पत्रों में प्रकाशित एक समाचार को देखते हैं जिसमें एक "चित्र 1" के माध्यम से "पैंगोंग झील" के उत्तरी किनारे पर "फिंगर 4" से लेकर "फिंगर 8" के बीच की स्थिति को समझने का प्रयास किया है।  चित्र 1 इस "चित्र 1" में हरि रेखा के जरिए, नियंत्रण रेखा (LAC) को दिखाने का प्रयास किया गया है, तथा झील के पास यह रेखा "फिंगर 8" से पास करती है और यहां तक भारतीय क्षेत्र के होने की बात कहीं है, तथा यह समझाने का प्रयास किया गया है की चीनी सेना "फिंगर 8" से घुसकर भारत की सीमा में "फिंगर 4" तक पहुंच गई है तथा "फिंगर 8" से "फिंगर 4" के बीच के "भारतीय हिस्से" पर कब्जा करके बैठी है। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारियों के आधार पर हम यह समझने का प्रयास करेंगे, कि क्या  लेख में जो बताया गया हैं वही पूरी तरह से ठीक है? और क्या वाकई में चीन की सेना "भारतीय क्षेत्र" में घुसी हुई है? अथवा इस तरह की खबरें मात्र कोरी कल्पनाएं ही है। तथ्यों को

नक्कारखाना : वर्तमान राजनैतिक परिस्थिति पर व्यंग



एक बार जंगल में योग्य अध्यक्ष का अभाव हुआ। संयोगवश अमावस्या की काली रात में एक उल्लू जो पेड़ की डाली पर बैठा था, वह कुछ छछूंदरो द्वारा देख लिया जाता है। शुरू में डरे हुए छछूंदरो का डर उनके निजी स्वार्थ की वजह से एक अवसर में बदल गया। वह उल्लू के किसी भी कथन को अपनी चमचागिरी और चापलूसी के माध्यम से और अपनी सुविधा अनुसार इंटरप्रेट करने लगे। तो जंगल के एक विशेष पशु तांत्रिक पार्टी के सभी पदाधिकारियों से चर्चा करने के बाद और उल्लू के सभी गुण धर्मों को बताने के बाद, उल्लू को अध्यक्ष बनाने का सुझाव दिया। दो गधों को उल्लू की परीक्षा लेने के लिए भेजा गया। गधों ने अमावस्या की रात में जाकर उल्लू से पूछा, हमारे कितने कान है? उल्लू ने बोला "हू", अनुवादक छछूंदरो ने गधों को एक्सप्लेन किया कि, उल्लू जी ने अंग्रेजी में कहां है, "टू", तभी सभी तरफ खुशी की लहर दौड़ गई, लेकिन एक और प्रश्न पूछना उचित समझा गया, गधों ने छछूंदरो की संख्या पूछी तो उल्लू जी ने फिर से कहां, "हू" इस पर छछूंदरो ने फिर से इंटरप्रेट किया, की उल्लू जी ने कहा है की "टू", साथ में छछूंदरो ने इनकी विशेष योग्यता का वर्णन किया कि, " ऐसा लगता है कि यह विदेश से डिग्री लेकर आए हैं और अंग्रेजी में ही बोलते हैं, साथ ही इनके अंदर रात में देखने का एक विशेष गुण है और यदि हमारा अध्यक्ष कोई ऐसा जीव हो जिसे रात में दिखाई दे, तो कमाल ही हो जाए और यह तो किसी रहीस खानदान के भी मालूम पड़ते हैं।"
 इस प्रकार जंगल के अध्यक्ष का चुनाव करने के बाद सभी वापस चल पड़े शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां करने के लिए, तभी, रास्ते में एक पत्रकार लोमड़ी मिली। उसने पूछा कि, "क्या होनेवाले अध्यक्ष को दिन में भी दिखाई देता है?", गधों ने उसे जवाब दिया कि, "जो रात में देख सकता है उसे दिन में भी दिखाई देता ही होगा!" और इस प्रकार लोमड़ी की होशियारी की हवा निकाल दी गई।
तत्पश्चात शपथ ग्रहण समारोह में जो कि दिन में आयोजित किया गया उल्लू जी की अध्यक्ष बनने की उत्सुकता और उनके दिन में ना देख पाने की असमर्थता प्रत्यक्ष देखी जा सकती थी, वह अजीब हरकतें और वक्तव्य देते पाए गए। वह जब भी बोलते छछूंदर और गधे उनके पढ़े लिखे होने, उनके अंग्रेजी ज्ञान, और उनके उच्च खानदान, का हवाला देकर उनके विरोधियों का मुंह बंद करने का प्रयास करते। दिन के उजाले से बेचैन उल्लू जी शपथ ग्रहण समारोह के तुरंत बाद किसी गुप्त स्थान और गुप अंधेरे में बने अपने घर की तरफ दौड़ते हैं। पीछे पीछे उनकी जंगल की प्रजा दौड़ती है।
उजाले में दिखाई ना देने की वजह से उल्लू जी रास्ते में कई गड्ढे और खाई को पार करते जा रहे थे। उनकी प्रजा गड्ढे और खाई में गिर गिर कर क्षत-विक्षत हो रही थी। उल्लू जी के चमचे प्रजा को उत्साहित कर रहे थे कि, तुम्हारा यह संघर्ष जंगल के प्रति समर्थन और बलिदान के रूप में देखा जाने वाला कृत्य होगा, तुम्हारे बाद तुम्हें पुरस्कृत और सम्मानित किया जाएगा,......... और यही सिलसिला सालों चलता रहा। फिर अचानक एकदिन उल्लू जी और उनके पदाधिकारियों के सामने तेज दौड़ता हुआ एक ट्रक आया पदाधिकारियों ने उल्लू जी से पूछा कि सामने से जो ट्रक आ रहा है उसका क्या करें? उल्लू जी फिर से बोले "हू" और चमचों ने फिर से अनुवाद किया,
वाह आप तो बड़े बहादुर हैं, लीडर हो तो ऐसा, आप इतने बहादुर हैं तो हमें डरने की क्या जरूरत है, अब आप की कई पुस्ते जंगल की अध्यक्ष होंगी, और हम आपके पुश्तैनी चमचे। और तभी ट्रक ऊपर से गुजरा और सभी ने एक साथ अपने दांत चियार दिए, और अंतिम सम्मान को प्राप्त हुए और उनके बाद जंगल अनाथ हो गया हमेशा के लिए, ऐसा बचे हुए चमचे कहते हैं।

Comments

Unknown said…
Nice story based on current scenario and the chrachtey have choose very interstingly ,words also

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